Thursday, December 22, 2011

चलते चलते इन राहों में...

प्रस्तुतकर्ता अनुपमा पाठक at २० दिसम्बर २०१०

चलते चलते इन राहों में...!


चलते चलते
इन राहों में
दो प्रेम की बातें
कर लें!

न मिलेगा
ये अवसर फिर
एक दूजे की पीर
हर लें!

संध्याबेला आ जायेगी
विदा का सन्देश लिए
भावसुधा का प्याला
भर लें!

सहज प्रेम और भक्ति से
संभव है
हम यह भवसागर
तर लें!

चलते चलते
इन राहों में
दो प्रेम की बातें
कर लें!

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