Friday, December 23, 2011

वक़्त हो चला है ..



प्रस्तुतकर्ता अनुपमा पाठक at २७ दिसम्बर २०१०


वक़्त हो चला है...!



कहते हुए
सुनते हुए
वक़्त हो चला है
सपने बुनते हुए
अब चलने की बारी है
गति और विश्वास साथ हों
फिर निश्चित ही
जीत हमारी है!


हँसते हुए
रोते हुए
वक़्त हो चला है
साँसे खोते हुए
अब संभलने की बारी है
बीतती हुई जिंदगी में
दो पल जी लेने की
आस्था हमारी है!


सोते हुए
जागते हुए
वक़्त हो चला है
बेवजह भागते हुए
अब समझने की बारी है
अंधी दौड़ में
यूँ शामिल होना
भूल हमारी है!

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