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Thursday, December 22, 2011
यही पूजन है
प्रस्तुतकर्ता अनुपमा पाठक at २२ नवम्बर २०१०
यही पूजन है!
खुले दिल से
सबका स्वागत हो
सबको स्थान मिले
हो सहर्ष दान...
विस्तार इतना हो-
जितना स्वयं
धरती आसमान...
यही पूजन है!
रहे प्रस्तुत सेवार्थ
जितनी जिसकी ताकत हो
सबके दिल हों खिले
इस अनुभूति को पहचान...
क्या गम क्या खुशी-
सब गले लगाएं
सबको अपना जान...
यही पूजन है!
बाँटीं जाएँ खुशियाँ
मौत जीवन का शरणागत हो
निर्द्वंद निर्भीक हों सिलसिले
उदित होते रहें दिनमान...
यह एहसास हो-
सब हैं एक
एक ही मालिक की संतान...
यही पूजन है!
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